अध्याय 3: माया का जाल
तीन महीने बाद रुद्र को एक स्वप्न आया। उसने देखा कि वो एक महल में है। सोने की दीवारें, हीरे की खिड़कियाँ। एक सुंदर देवी ने कहा, "यह सब तुम्हारा है। बस मुझे अपना लो।" रुद्र ने कहा, "मुझे कुछ नहीं चाहिए। मुझे सत्य चाहिए।" स्वप्न टूट गया। वो फिर से कैलाश पर बैठा था। उसने माया को पार कर दिया था।