अध्याय 4: सच्चाई का पता

पाँच साल बीत गए। एक दिन उनकी माँ को दिल का दौरा पड़ा। अमन मुंबई से आया। रोहन ने उसे देखा और अपने कमरे में चला गया। अमन ने माँ से पूछा, "भइया मुझसे इतना नाराज़ क्यों हैं?" माँ ने आँसू भरी आँखों से कहा, "वो तुमसे नाराज़ नहीं हैं। वो खुद से नाराज़ हैं। उन्हें लगता है कि उन्होंने तुम्हारी ज़िंदगी बर्बाद कर दी।" अमन दंग रह गया।

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