अध्याय 2: पहली चौकी

तीन दिन की ट्रेनिंग के बाद सुरेंद्र को पहली चौकी पर लगाया गया। रात में तूफ़ान आया। बर्फ़ की लपटें तेज़ी से गिर रही थीं। सुरेंद्र और उसके दो साथी बंकर में बैठे थे। अचानक रेडियो पर संदेश आया - "दुश्मन की हरकत।" सुरेंद्र ने अपना हथियार उठाया। ठंड से उसके हाथ सुन्न हो रहे थे। पर उसने अपनी जगह बनाए रखी। उस रात कुछ नहीं हुआ। पर सुरेंद्र ने सीखा कि सतर्कता का कोई विराम नहीं।

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