अध्याय 3: परिवार का बंटन
दिन बीतते गए। विक्रम की शादी तय हो गई एक व्यापारी की बेटी से, पर उसका दिल किसी और के लिए धड़क रहा था। आर्य घर से निकल गया अपनी फ़िल्म के लिए। कबीर ने मेडिकल कॉलेज में एडमिशन ले लिया। दिव्या अपने कमरे में बंद रहती, लिखती रहती। महल में सन्नाटा छा गया। राज जी और उनकी पत्नी मीरा देख रहे थे कि उनका परिवार बिखर रहा है। एक जमी हुई इमारत खाली होती जा रही थी।